लॉकडाउन में सेनेटरी पैड न मिलने पर महिलाएं कर रहीं कपड़े का इस्तेमाल


- महामारी के लिए नहीं रूकती माहवारी
- एमएचएआई के सर्वेक्षण से हुआ ख़ुलासा
- माहवारी स्वच्छता दिवस (28 मई) पर विशेष
सीतापुर, 27 मई। लॉकडाउन के कारण सेनेटरी नैपकिन पैड का निर्माण और शहर से लेकर गांव तक उसकी उपलब्धता प्रभावित हुई है। ऐसे में महिलाएं और किशोरियां डिस्पोजेबल पैड की जगह कपडे के पैड इस्तेमाल कर रही हैं। यह खुलासा वाटर ऐड इंडिया एंड डेवलपमेंट सौलूशन द्वारा समर्थित मेंसट्रूअल हेल्थ अलायन्स इंडिया (एमएचएआई) द्वारा माहवारी स्वच्छता जागरूकता एवं उत्पाद से जुड़े संस्थानों से इस वर्ष के अप्रैल माह में सर्वेक्षण किया गया। एमएचएआई भारत में मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता पर काम करने वाले गैर सरकारी संगठनों, शोधकर्ताओं, निर्माताओं और चिकित्सकों का एक नेटवर्क है। सर्वेक्षण में महामारी के दौरान सेनेटरी पैड का निर्माण, पैड का समुदाय में वितरण, सप्लाई चेन में चुनौतियाँ, सेनेटरी पैड की समुदाय में पहुँच एवं जागरूकता संदेश जैसे विषयों पर राय ली गयी। माहवारी स्वच्छता जागरूकता एवं उत्पाद को लेकर एमएचएआई द्वारा कराये गए सर्वे में देश एवं विदेश के 67 संस्थानों ने हिस्सा लिया।
कोविड-19 के पहले माहवारी स्वच्छता जागरूकता एवं उत्पाद से जुड़े 89 प्रतिशत संस्थान सामुदायिक आधारित नेटवर्क एवं संस्थान के माध्यम से समुदाय तक पहुँच रहे थे, 61 प्रतिशत संस्थान स्कूलों के माध्यम से सेनेटरी पैड वितरित कर रहे थे, 28 प्रतिशत संस्थान घर-घर जाकर पैड का वितरण कर रहे थे, 26 प्रतिशत संस्थान ऑनलाइन एवं 22 प्रतिशत संस्थान दवा दुकानों एवं अन्य रिटेल शॉप के माध्यम से सेनेटरी पैड वितरण कार्य में लगे थे, लेकिन महामारी के बाद 67 प्रतिशत संस्थानों ने अपनी सामान्य कार्रवाई को रोक दी है। कई छोटे एवं मध्य स्तरीय निर्माता सेनेटरी पैड निर्माण करने में असमर्थ हुए हैं जिसमें 25 प्रतिशत संस्थान ही निर्माण कार्य पूरी तरह जारी किए हुए हैं तथा 50 प्रतिशत संस्थान आंशिक रूप से ही निर्माण कार्य कर पा रहे हैं।
स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. नीलम सिंह का मानना है कि बाजार में बिकने वाले सेनेटरी पैड के विकल्प के रूप में कपड़े से बने पैड को भी प्रचारित किया जा सकता है। कपड़ों से बने पैड को 4-6 घंटे तक इस्तेमाल किया जा सकता है। पैड बदलने से पहले और बाद में हाथों की सफाई की जाए, साफ़ सूती कपडे से बने पैड ही इस्तेमाल में लाये जाएं और पैड को अच्छी तरह धोने के बाद धूप में सुखाया जाए ताकि किसी भी तरह के संक्रमण के प्रसार का खतरा कम हो सके ।
इनसेट ---
महिलाओं व किशोरियों की राय जरूरी ---
इंटरनेशनल सेंटर फॉर रिसर्च ऑन वीमेन की एशिया की टेक्निकल एक्सपर्ट सपना केडिया कहती हैं, माहवारी स्वच्छता कार्यक्रमों के बेहतर क्रियान्वयन के लिए इस संबंध में महिलाओं एवं लडकियों से भी फीडबैक लेनी चाहिए। इस फीडबैक में मासिक धर्म स्वास्थ्य उत्पादों एवं सेवाओं की उपलब्धता, पहुंच, लागत, स्वीकार्यता (गुणवत्ता और अन्य स्थानीय कारक) को शामिल करना चाहिए।

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